देश में 75 वर्षों में हुए आर्थिक विकास की विवेचना है पुस्तक आर्थिक सफरनामा में
A review of आर्थिक सफ़रनामा
बीकानेर | पिछले महीने बाजार में आई पुस्तक आर्थिक सफरनामा देश के 75 वर्षों में हुई आर्थिक विकास की स्थिति की विवेचना करती है और उन पर रोशनी डालती है। आमतौर से आर्थिक विषयों पर लिखी जाने वाली पुस्तके क्लिष्ट होती है लेकिन लेखक डॉ.पीएस वोहरा की इस पुस्तक की भाषा शैली बहुत ही सरल है, जिससे ये आम आदमी को बहुत आकर्षित कर रही है। इस पुस्तक को अच्छी चर्चा मिल रही है। अखबारों व मैगजीन में तो इस पुस्तक के रिव्यू पब्लिश हो ही रहे है साथ ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी इसे पाठकों का अच्छा रेस्पोंस मिल रहा है। 23 अप्रैल को जयपुर के एक होटल में इस किताबपर रिव्यू सेशन भी हुआ जिसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों के बुद्धिजीवी वर्ग शामिल हुए। भारती पब्लिकेशन हाउस, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में 252 पृष्ठ हैं। पांच भागों में प्रकाशित इस पुस्तक के पहले भाग में हरित क्रांति, एलआईसी, क्रिकेट और एलपीजी सुधारों सहित स्वतंत्र भारत की 4 ऐतिहासिक घटनाओं को शामिल किया गया है। वहीं दूसरे भाग में भारतीय अर्थव्यवस्था की विभिन्न चुनौतियों को शामिल किया गया है, जिसमें बेरोजगारी, गरीबी स्तर, आम आदमी के मुद्दे, किसान मुद्दे, असंगठित क्षेत्र के मुद्दे, मुद्रास्फीति, राज्य और केंद्र का ऋण स्तर, महिलाओं का वित्तीय सशक्तिकरण, पेंशन, ढांचागत विकास, मनरेगा, जनसंख्या और खुशी सूचकांक जैसे कुल 13 विभिन्न मुद्दों है। तीसरे भाग में समाज के समग्र विकास के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न कार्यों के बारे में बताया है। चौथे भाग में अनेक वैश्विक पहलुओं के बारे में बताया गया है। वहीं इस पुस्तक के पांचवें भाग में सबसे अच्छा हिस्सा है जो दुकानदार, किसान, सब्जी विक्रेता, दूधवाला, टैक्सी चालक, सड़क किनारे विक्रेता, संपत्ति डीलर, एलआईसी डीलर, शेयर दलाल सहित आम आदमी की विभिन्न श्रेणियों की वास्तविक आर्थिक जीवन शैली को दर्शाता है।