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आर्थिक सफर की जानकारी देती पुस्तक
A review of आर्थिक सफ़रनामा
विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था के स्तर पर पहुंचने के लिए हमारे मुल्क ने कड़ा संघर्ष किया है. देश के आर्थिक विकास की डगर में अनेक चुनौतियां हैं, तो ऐसे अवसर भी हैं, जिनसे अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है. आर्थिक विचारक और स्तंभकार डॉ पीएस वोहरा की पुस्तक 'आर्थिक सफरनामा' में आजाद भारत की आर्थिक उन्नति की विवेचना है. पुस्तक की भाषा सरल है, जिससे सामान्य आदमी को भी आर्थिक विषय की जानकारी सहजता से मिल जाती है. पांच भागों में विभाजित पुस्तक का पहला हिस्सा पिछले 75 वर्षों की कई रोचक आर्थिक घटनाओं की जानकारियों से लबरेज है. लेखक ने इनमें हरित क्रांति, एलआईसी, क्रिकेट, एलपीजी सुधारों आदि को शामिल किया है. दूसरे खंड में लेखक ने भारतीय अर्थव्यवस्था की लगातार चली आ रही कुछ समस्याओं के वास्तविक कारणों को बताया है. इस भाग में 13 प्रकार की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा है, जिनमें बेरोजगारी, गरीबी, आम आदमी, मुद्रास्फीति, राज्य और केंद्र का ऋण स्तर, महिलाओं का वित्तीय सशक्तीकरण, पेंशन, ढांचागत विकास, मनरेगा, जनसंख्या आदि शामिल हैं. तीसरा खंड समाज के समग्र विकास के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न कार्यों के बारे में बताता है. इसमें रोजगार, जीएसटी, आत्मनिर्भरता, शेयर बाजार, डिजिटल मुद्रा, गिग इकॉनमी, जी-20 सहित सात अध्याय हैं. यहां भी लेखक ने विस्तृत विश्लेषण हेतु अनेक तथ्यों और आंकड़ों का प्रयोग किया है.
पुस्तक के चौथे भाग में अनेक वैश्विक पहलुओं पर लिखा गया है और इसमें भारत के लिए बाधाओं व अवसरों की विवेचना है, जैसे- भारत की आयात पर निर्भरता, विदेशी मुद्रा संग्रह, डॉलर की मजबूती के संकट, कच्चा तेल, रूस-यूक्रेन मुद्दा, पड़ोसी देश- श्रीलंका, पाकिस्तान व बांग्लादेश- की आर्थिक दशा आदि की सारगर्भित व्याख्या की गयी है. पुस्तक का अंतिम भाग भारतीय समाज में विभिन्न पेशे से जुड़े लोगों की व्याख्या की गयी है, जो अपने-आप में एक नवाचार है. व्यक्तिगत साक्षात्कार के माध्यम से लेखक ने दुकानदार, किसान, सब्जी विक्रेता, दूध विक्रेता, टैक्सी चालक, सड़क किनारे भोजन विक्रेता, संपत्ति डीलर, एलआईसी डीलर, शेयर दलाल, सरकारी और निजी शिक्षक सहित आम आदमी के विभिन्न तबकों की वास्तविक आर्थिक जीवन शैली को जानने और बताने का प्रयास किया है, जो बहुत भावुक कर देने वाला है.
यह पुस्तक भारती पब्लिकेशान हाउस, नयी दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गयी है. डॉ वोहरा की यह किताब सरल भाषा के आवरण में खुद को लपेटे हुए आम लोगों के लिए खास बनने का माद्दा रखती है. यह आर्थिक विषय की जानकारी हासिल करने के इच्छुक विद्यार्थियों और सामान्य जन के लिए उपयोगी साबित होगी, ऐसी उम्मीद है.
– डॉ चंद्रशेखर श्रीमाली