प्रभात खबर
फीकी रहेगी दीपावली
डॉ पी एस वोहरा
आर्थिक मामलों के जानकर
आखिकार साढ़े तीन साल बाद आरबीआई ने रेपो ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी। संजय मल्होत्रा के कार्यकाल में यह पहली बढ़ोतरी है। अगस्त की बैठक में भी महंगाई का जोखिम था, फिर भी दर 5.25 प्रतिशत पर ही रखी गई। अब जब दीपावली सामने थी, तो क्या यह फैसला एक तिमाही और टाला नहीं जा सकता था?
दबाव महंगाई का था। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत रही और आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार है और रुपया लगातार कमज़ोर और 97 के आसपास है। इसके अलावा जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने भी ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ा दी तो आरबीआई को करना ही था।
लेकिन इसका असर आम आदमी पर पड़ेगा। अब यदि आठ लाख रुपये के पांच वर्षीय वाहन ऋण की ब्याज दर 8.40 से 8.65 प्रतिशत हो जाए, तो मासिक किस्त करीब 16,353 से 16,449 रुपये हो सकती है। वहीं दस लाख रुपये के सात वर्षीय शिक्षा ऋण में 10.10 से 10.35 प्रतिशत की दर होने पर किस्त करीब 16,655 से 16,785 रुपये हो सकती है, यानी वर्तमान में ही ऋण की लागत बढ़ना अब तय है।
दूसरी ओर सावधि जमा वालों को लाभ मिल सकता है। यदि बैंक दरों में पूरी 0.25 प्रतिशत वृद्धि देते हैं, तो दस लाख रुपये की जमा पर करीब 2,500 रुपये सालाना अतिरिक्त ब्याज मिल सकता है।
पिछली दीपावली में करीब छह लाख करोड़ रुपये की खरीदारी हुई थी। तब जीएसटी की दरें 28 से घटाकर 18 प्रतिशत करने से घरेलू मांग को सहारा मिला था। पर इस बार महंगा ऋण वाहन, आवास और उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बहुत धीमी रह सकती है। इससे वाहन कंपनियों, इलेक्ट्रॉनिक आदि के त्योहारी कारोबार और मुनाफे पर भी दबाव संभव है।
महंगाई रोकना जरूरी है, लेकिन सवाल है क्या इस बार वैश्विक दवाब की कीमत आम आदमी की दीपावली की खरीदारी चुकाएगी?