राजस्थान पत्रिका
क्या एलआईसी आईपीओ सभी के विश्वास पर खरा उतरेगा
सामयिक: सरकार का लक्ष्य 90,000 करोड़ रुपए तक जुटाने का
इन दिनों हर व्यक्ति की जुबान पर एलआईसी आईपीओ की चर्चा हैं। हर कोई समझना चाहता हैं कि आने वाले कुछ दिनों में भारतीय पूंजी बाजार में एलआईसी का आईपीओ कैसा होगा? क्या ये सफलता के सभी रेकॉर्ड तोड़ेगा? क्या इससे भारत के पूंजी बाजार को एक नई दिशा मिलेगी? इन दिनों यह भी महसूस किया जा रहा हैं कि हर व्यक्ति इस आईपीओ के बारे में जानकारी चाहता हैं तथा समझना चाहता हैं कि उसे इससे मुनाफा ही होगा या नहीं। आम आदमी निश्चित हो जाना चाहता हैं कि एलआईसी की विभिन्न पॉलिसी की तरह ही ये आईपीओ भी क्या उसकी आर्थिक सुरक्षा करेगा? यह सब बातें अब ज्यादा भविष्य के गर्त में नहीं रहने वाली हैं।
हालांकि इस आईपीओ की आधिकारिक घोषणा भारत सरकार के द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष के बजट में ही कर दी गई थी। पिछले कुछ दिनों से इस संबंध में बहुत तेजी से कार्य हुआ हैं क्योंकि चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 समाप्ति की ओर हैं। अभी सरकार की प्राथमिकता में अर्थव्यवस्था में वित्तीय घाटा कम करना हैं और वास्तविकता में विनिवेश ही इस संदर्भ में एकमात्र उपाय हैं। एलआईसी का ये आईपीओ भी एक विनिवेश का ही रूप हैं। भारत सरकार 1956 में स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम में 100 प्रतिशत मालिकाना हक रखती हैं। इस आईपीओ के माध्यम से भारत सरकार अपने 5 प्रतिशत स्वामित्व का विनिवेश कर रही हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अब आम जनता भी भारतीय जीवन बीमा निगम में 5 प्रतिशत के मालिकाना हक की भागीदार बन सकती हैं।
भारतीय जीवन बीमा निगम पिछले 65 वर्षों से भारत में बीमा के क्षेत्र में अग्रणी रूप से कार्यरत हैं। वर्ष 1956 में भारत सरकार के द्वारा 245 निजी बीमा कंपनियों को मिलाकर इस भारतीय जीवन बीमा निगम को स्थापित किया गया था। वर्तमान वित्तीय वर्ष तक एलआईसी का भारत में व्यक्तिगत जीवन बीमा के क्षेत्र में 74.6 प्रतिशत का योगदान हैं। वहीं भारत में कुल प्राप्त बीमा प्रीमियम में इसका 64 प्रतिशत हिस्सा हैं। पिछले वर्ष में इसका मुनाफा 9.75 प्रतिशत की दर से बढ़कर 2,974 करोड़ रुपए हो गया। वही पिछले वर्ष इसकी संपत्तियां 3,32,229 करोड़ रुपए से बढ़ी हैं।
विश्लेषणात्मक पक्ष से अगर देखा जाए तो विनिवेश निजीकरण का एक माध्यम होता हैं। केंद्र सरकार के द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में प्रस्तुत बजट के अंतर्गत विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए एलआईसी के आने वाले आईपीओ से सरकार करीब 75,000 करोड़ से 90,000 करोड़ रुपए को एकत्रित करने का लक्ष्य रख रही हैं। इस कारण ये भारत के पूंजी बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इससे पूर्व के सबसे बड़े आईपीओ में पेटीएम व गेल इंडिया का नाम आता हैं। इस आईपीओ के माध्यम से केंद्र सरकार के द्वारा एलआईसी में अपनी 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी को आम निवेशकों को बेचा जाएगा। यहां पर यह बात भी महत्त्वपूर्ण हैं कि एलआईसी इस आईपीओ में 10 प्रतिशत हिस्से में प्राथमिकता अपने पॉलिसी होल्डर्स को देगी। निश्चित रूप से इस कदम से एलआईसी के उन सभी पॉलिसी होल्डर्स में काफी उत्साह हैं।
अब प्रश्न यह उठता हैं कि क्या वास्तव में एलआईसी का ये आईपीओ एक आम भारतीय को वैसी ही लाभदायकता व आर्थिक सुरक्षा देगा जो आज तक उसकी जीवन बीमा पॉलिसी देती रही हैं? विश्लेषणात्मक अध्ययनों के अनुसार यह हो पाना संभव नहीं लगता हैं। इसके पीछे के कारणों में मुख्य कारण तो शेयर बाजार की कार्यप्रणाली है, उसकी कम विश्वसनीयता हैं। और तो और शेयर बाजार में सदैव उठापटक के पीछे के विभिन्न कारण होते हैं जिनसे आम आदमी सदैव अनजान ही रहता हैं। सकारात्मक पक्ष पर अगर चलें तो तय लगता हैं कि एलआईसी के शेयर में बहुत ज्यादा उठापटक नहीं होगी तथा यह निवेशकों को प्रतिवर्ष लाभांश के रूप में एक निश्चित आर्थिक मुनाफा जरूर देगा। ऐसा ही अन्य कई पीएसयू जैसे गेल इंडिया, कोल इंडिया इत्यादि में अक्सर देखा गया हैं।