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मुक्त व्यापार समझौतों और वैश्विक बदलावों के दबाव में बनाया गया है केंद्रीय बजट, चांदी की बढ़ती कीमतों को रोकने का प्रयास नहीं

सोमवार 2 फरवरी, 2026

2026-27 का बजट पूरी तरह वैश्विक स्तर पर हुए बदलावों के दबाव में आया। इसलिए तीव्र आर्थिक सुधार बजट से नदारद दिखे। सबसे अधिक हैरानी वाली बात सरकार के द्वारा पूंजीगत खर्चों में बढ़ोतरी के संबंध में भी कोई घोषणा नहीं हुई जो बीते कई वर्षों में मोदी सरकार की एक बहुत बड़ी ताकत रही है। इसी के चलते बजट के तुरंत बाद स्टॉक मार्केट में बहुत बड़े स्तर गिरावट पर दर्ज हुईं।

सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों के दबाव के चलते पहले से ही दिवाली से पूर्व जीएसटी की दरों में बहुत बड़े स्तर पर कमी कर चुकी है जिससे राजस्व घटा है। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार के द्वारा आयकर की सीमा में भी बड़ा बदलाव किया गया। जिसके चलते भी प्रत्यक्ष करों के संग्रहण में तुलनात्मक रूप से कमी हुई। यही वजह रही कि पूंजीगत खर्चों में बढ़ोतरी पर कोई घोषणा नहीं हुई। ये बजट सरकार के द्वारा ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बचने के लिए बीते कुछ महीनों में बड़ी तेजी से हुए मुक्त व्यापार समझौतों की छाया में बना है। सरकार जीएसटी के दरों में कमी से घरेलू बाजार में बचत को पहले से ही बढ़ा चुकी है और अब सरकार का पूरा फोकस मुक्त व्यापार समझौते के तहत निर्यातों को बढ़ाने पर है। उसी के माध्यम से विदेशी पूंजी बाजार के संग्रहण पर भी। सरकार ने राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण को स्थापित कर लेने हेतु अपनी पीठ भी थपथपाई है। इस संबंध में वर्ष 2021-22 में की गई घोषणा के तहत राजकोषीय घाटे 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने में सफलता का जिक्र भी किया है और आगामी बजट में इसे 4.3 प्रतिशत पर लाने के उद्देश्य को बड़ी प्रमुखता के साथ रखा भी है।

क्लाउड सर्विसेज देने वालों को छूट सराहनीय

एआई के क्षेत्र में भारत का तेज कदम बढ़ाने का लक्ष्य है। सरकार ने भारत में क्लाउड सर्विसेज के अंतर्गत अपनी सेवाएं प्रदान करने वाली सभी विदेशी कंपनियों को 2047 तक शत प्रतिशत कर छूट देने की घोषणा की है। यह कदम बहुत उत्साहजनक है। अभी एआई के वे भारतीय स्टार्टअप्स जो भारत छोड़कर अमेरिका में सेवाएं दे रहे हैं उन्हें वापस आकर्षित करने के प्रयास नहीं दिखे। बैंकिंग सेक्टर के लिए जरूर सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाया है। जिसका असर आने वाले समय में नजर आएगा।

सोने चांदी की बढ़ती कीमतों पर सरकार की चुप्पी समझ से परे

सोने और चांदी के मूल्य पर लगातार हो रही बढ़ोतरी पर बजट में किसी भी प्रकार की ड्यूटी कम नहीं की गई। चांदी के मूल्य में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि जिसने असंगठित क्षेत्र के रोजगार पर बहुत बड़ी मार पहले से ही कर दी है उसे पर सरकार का मौन रहना समझ से बाहर है।

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