Economy
क्या फीकी रहेगी दीपावली?

क्या 114 डॉलर का कच्चा तेल अब भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नई चिंता बनने जा रहा है? जून में कच्चा तेल करीब 83 डॉलर, जुलाई में 82 डॉलर और अगस्त में करीब 90 डॉलर प्रति बैरल था। अब यह 110 से 114 डॉलर के आसपास पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए कच्चे तेल की कीमत में इतनी तेज बढ़ोतरी केवल आयात बिल नहीं बढ़ाती, बल्कि परिवहन, उत्पादन और कंपनियों की लागत पर भी दबाव डालती है।
महंगाई बढ़ी तो आरबीआई के सामने बढ़ेगी चुनौती
महंगाई के आंकड़े पहले ही चेतावनी दे रहे हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि रिजर्व बैंक का मध्यम अवधि का लक्ष्य 4 प्रतिशत है। यानी महंगाई लक्ष्य से ऊपर जा चुकी है। अभी यह 6 प्रतिशत की ऊपरी सहनशीलता सीमा के भीतर है, लेकिन यदि कच्चा तेल 100 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बना रहता है और उसका असर अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचता है, तो महंगाई के 5 प्रतिशत से ऊपर जाने का जोखिम बढ़ सकता है।
यहीं से अक्टूबर की मौद्रिक नीति समिति का महत्व बढ़ जाता है। वर्तमान रेपो दर 5.25 प्रतिशत है और मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर को होनी है। यदि महंगे कच्चे तेल से महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता है तो रिजर्व बैंक के सामने ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बन सकता है। साथ ही बैंकिंग व्यवस्था में अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए भी मौद्रिक सख्ती की जरूरत पड़ सकती है।
लेकिन आरबीआई के सामने चुनौती केवल महंगाई की नहीं है। ब्याज दर बढ़ने का सीधा असर कर्ज पर पड़ेगा। वाहन ऋण, उपभोक्ता ऋण और दूसरे कर्ज महंगे हो सकते हैं। इसका असर ऐसे समय में होगा जब देश त्योहारी खरीदारी के दौर में प्रवेश कर रहा है।
पिछले साल तो जीएसटी ने 28 से 18 प्रतिशत की दर घटाकर बढ़ाई थी मांग
पिछले वर्ष कई ऑटोमोबाइल श्रेणियों पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के बाद वाहन बाजार में मांग तेज हुई थी। मारुति सुजुकी का जुलाई से सितंबर 2025 की तिमाही में शुद्ध लाभ 3,293 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही से 7.3 प्रतिशत अधिक था। कंपनी की तिमाही शुद्ध बिक्री 40,136 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची।
महिंद्रा एंड महिंद्रा का इसी तिमाही में समेकित शुद्ध लाभ 3,673 करोड़ रुपये रहा। टाटा मोटर्स की सितंबर 2025 में यात्री वाहन बिक्री 60,907 इकाई रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 47 प्रतिशत अधिक थी। कंपनी ने बताया था कि जीएसटी दरों में कमी के बाद सितंबर के दूसरे पखवाड़े में नई बुकिंग दोगुनी हो गई थी।
आरबीआई के रेपो दर पर फैसले का दीपावली पर असर होगा ही
यही कारण है कि अक्टूबर की आरबीआई बैठक महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ाने का खतरा पैदा कर रहा है, दूसरी तरफ ब्याज दर बढ़ाने से कर्ज महंगा होकर मांग को प्रभावित कर सकता है। रिजर्व बैंक को महंगाई और आर्थिक गतिविधि के बीच संतुलन बनाना होगा।
यदि कच्चा तेल 100 डॉलर से ऊपर बना रहता है और महंगाई 5 प्रतिशत के ऊपर जाती है, तो आरबीआई के लिए मौद्रिक नीति को सख्त करने का दबाव बढ़ेगा। इसका असर केवल वित्तीय बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर उस उपभोक्ता तक पहुंचेगा जो अक्टूबर के मध्य से दीपावली की खरीदारी की तैयारी शुरू करेगा।
दीपावली 8 नवंबर को है, लेकिन खरीदारी इसकी तारीख से काफी पहले शुरू हो जाती है। अक्टूबर के मध्य से वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, कपड़े, आभूषण और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांग तेज होने लगती है। यानी दीपावली की वास्तविक आर्थिक गतिविधि त्योहार से कई सप्ताह पहले शुरू हो जाती है।
यानी उपभोक्ता के सामने एक साथ महंगे उत्पाद और महंगे कर्ज की स्थिति बन सकती है।