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नेतृत्व की नई पाठशाला
Learning to Lead
विद्यार्थी से मार्गदर्शक तक
मेरी एक नई शैक्षिक पहल
मैं हमेशा से मानता रहा हूँ कि विद्यालय में नेतृत्व का अर्थ केवल किसी विद्यार्थी को हेड बॉय या हेड गर्ल बना देना नहीं है। यदि हम किसी विद्यार्थी को नेता कहते हैं, तो उसे नेतृत्व करने का अवसर भी मिलना चाहिए, जिम्मेदारी निभाने का अनुभव भी होना चाहिए और दूसरों के विकास में योगदान देने का अवसर भी मिलना चाहिए।
इसी सोच से मैंने विद्यार्थियों के लिए एक ऐसी प्रक्रिया शुरू की, जिसमें नेतृत्व केवल एक पद प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विद्यार्थी के सीखने और व्यक्तित्व विकास की एक पूरी यात्रा बन जाता है।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व की भावना, जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। मैं चाहता हूँ कि विद्यार्थी केवल अपने लिए आगे बढ़ना न सीखे, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ाने का प्रयास करे।
सबसे पहले विद्यार्थी स्वयं आगे आता है
इस प्रक्रिया की शुरुआत कक्षा 12 के विद्यार्थियों से होती है। जो विद्यार्थी हेड बॉय या हेड गर्ल बनना चाहते हैं, वे स्वयं आगे आकर अपना नाम देते हैं।
मेरे विचार से नेतृत्व की पहली पहचान यही है कि विद्यार्थी स्वयं जिम्मेदारी लेने के लिए आगे आए।
लेकिन केवल नाम देना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थी की पिछली कक्षा के अंक, विद्यालय में उसका व्यवहार, अनुशासन, किसी प्रकार की शिकायत का अभाव और विद्यालय की अलग अलग गतिविधियों में उसकी भागीदारी को भी देखा जाता है।
मैं केवल अच्छे अंक वाले विद्यार्थी को चुनना नहीं चाहता। मैं ऐसे विद्यार्थी को चुनना चाहता हूँ जिसमें पढ़ाई के साथ अच्छा व्यवहार, जिम्मेदारी और नेतृत्व करने की क्षमता भी हो।
इसके बाद होती है सोच की परीक्षा
नाम देने के बाद विद्यार्थियों के लिए एक विशेष परीक्षा रखी जाती है। इसमें केवल किताबों से जुड़े प्रश्न नहीं होते।
विद्यार्थियों के सामने ऐसी परिस्थितियाँ रखी जाती हैं जिनमें उन्हें सोचना होता है और अपना निर्णय बताना होता है।
यदि विद्यालय में कोई समस्या आ जाए तो वे क्या करेंगे?
यदि दो विद्यार्थियों के बीच झगड़ा या मतभेद हो जाए तो वे उसे कैसे सुलझाएँगे?
यदि उन्हें विद्यालय में कोई अच्छा बदलाव करने का अवसर मिले तो वे क्या करना चाहेंगे?
वे अपने विद्यालय और समाज के लिए क्या सोचते हैं?
इन प्रश्नों से यह समझने का प्रयास किया जाता है कि विद्यार्थी किसी परिस्थिति में किस तरह सोचता है, किस आधार पर निर्णय लेता है और भविष्य के लिए उसकी सोच क्या है।
मेरे लिए यह जानना अधिक जरूरी है कि विद्यार्थी केवल सही उत्तर जानता है या नहीं, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह सोचता कैसे है।
पूर्व विद्यार्थी भी चयन का हिस्सा बनते हैं
इसके बाद सभी विद्यार्थियों का व्यक्तिगत साक्षात्कार विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों के एक समूह द्वारा किया जाता है।
मैंने पूर्व विद्यार्थियों को इस प्रक्रिया में इसलिए जोड़ा क्योंकि वे स्वयं कभी इसी विद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने विद्यालयी जीवन को देखा और जिया है और आगे चलकर अपने जीवन में अनेक अनुभव प्राप्त किए हैं।
वे वर्तमान विद्यार्थियों से बातचीत करके उनके विचार, आत्मविश्वास, समझ, व्यवहार और नेतृत्व की क्षमता को देखते हैं।
साक्षात्कार के बाद पूरी प्रक्रिया के आधार पर हेड बॉय और हेड गर्ल का अंतिम चयन किया जाता है।
लेकिन मेरे लिए यहीं से काम खत्म नहीं होता।
यहीं से विद्यार्थी के नेतृत्व की असली शुरुआत होती है।
पद के साथ शपथ और जिम्मेदारी
चयनित हेड बॉय और हेड गर्ल को विद्यार्थी सभा में शपथ दिलाई जाती है।
यह शपथ केवल एक कार्यक्रम नहीं है। इसका उद्देश्य उन्हें यह समझाना है कि उन्हें मिला हुआ पद सम्मान के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।
अब उनके व्यवहार और काम को दूसरे विद्यार्थी भी देखेंगे। वे उनसे सीखेंगे और उनसे प्रेरणा लेंगे।
इसलिए उन्हें अपने व्यवहार और काम दोनों में एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।
विशेष वेशभूषा और विशेष जिम्मेदारी
हेड बॉय और हेड गर्ल के लिए विशेष औपचारिक वेशभूषा रखी गई है। वे एक विशेष सूट पहनते हैं, जिससे उनकी अलग पहचान बनती है।
इसका उद्देश्य केवल उन्हें अलग दिखाना नहीं है। यह वेशभूषा उन्हें हर दिन उनकी जिम्मेदारी की याद दिलाती है।
जब वे यह वेशभूषा पहनते हैं, तो उन्हें यह भी याद रहता है कि अब वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे विद्यालय के लिए एक उदाहरण हैं।
नेता से मार्गदर्शक बनने की यात्रा
मेरी इस पहल की सबसे खास बात यह है कि हेड बॉय और हेड गर्ल केवल विद्यालय का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
वे विद्यालय के छोटे विद्यार्थियों को भी पढ़ाते हैं।
वे नियमित रूप से छोटे विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के सत्र लेते हैं। उनकी पढ़ाई में सहायता करते हैं, अपनी पढ़ाई के अनुभव बताते हैं और उन्हें बेहतर तरीके से सीखने में मदद करते हैं।
इससे छोटे विद्यार्थियों को अपने ही विद्यालय का एक ऐसा बड़ा विद्यार्थी मिलता है जिससे वे आसानी से जुड़ सकते हैं।
वे अपने सामने देखते हैं कि उनसे कुछ वर्ष आगे का एक विद्यार्थी पढ़ाई के साथ नेतृत्व भी कर सकता है और दूसरों की मदद भी कर सकता है।
इससे उनमें भी आगे बढ़ने की इच्छा पैदा होती है।
दूसरी ओर, जब हेड बॉय और हेड गर्ल छोटे विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं, तो उनका अपना व्यक्तित्व भी विकसित होता है।
उन्हें धैर्य रखना सीखना पड़ता है। किसी बात को सरल तरीके से समझाना पड़ता है। दूसरे विद्यार्थी की समस्या समझनी पड़ती है और उसके साथ समय देना पड़ता है।
इस पूरी प्रक्रिया से उनके अंदर आत्मविश्वास, धैर्य, जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति समझ बढ़ती है।
विद्यार्थी को उसके काम का वेतन
इस पहल की एक विशेष बात यह भी है कि छोटे विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए हेड बॉय और हेड गर्ल को वेतन दिया जाता है, ठीक उसी प्रकार जैसे विद्यालय के अन्य शिक्षक अपने शिक्षण कार्य के लिए वेतन प्राप्त करते हैं।
मेरे लिए यह केवल पैसे देने की व्यवस्था नहीं है।
मैं चाहता हूँ कि विद्यार्थी छोटी उम्र में ही यह समझे कि उसके ज्ञान और मेहनत का भी मूल्य है।
यदि वह अपने समय और ज्ञान का उपयोग किसी दूसरे विद्यार्थी को आगे बढ़ाने में करता है, तो उसके इस काम को केवल प्रशंसा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उसके काम का उचित सम्मान भी होना चाहिए।
इससे विद्यार्थी जिम्मेदारी के साथ काम करना, अपने समय का सही उपयोग करना और अपने काम के प्रति जवाबदेह होना सीखता है।
उसे यह अनुभव होता है कि ज्ञान केवल अपने लिए रखने की चीज नहीं है। ज्ञान को बाँटकर भी किसी दूसरे के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।
एक विद्यार्थी से दूसरे विद्यार्थी तक
मेरे लिए इस पहल की सबसे बड़ी सफलता यह नहीं है कि हर वर्ष हेड बॉय और हेड गर्ल कौन बनता है।
मेरी असली खुशी तब होगी जब आज का कोई छोटा विद्यार्थी अपने बड़े भाई या बहन जैसे हेड बॉय या हेड गर्ल को देखकर प्रेरित हो और कुछ वर्षों बाद स्वयं आगे आकर कहे कि वह भी विद्यालय के लिए जिम्मेदारी लेना चाहता है।
फिर वही विद्यार्थी किसी और छोटे बच्चे की मदद करे।
इस तरह एक विद्यार्थी दूसरे विद्यार्थी को प्रेरित करेगा और धीरे धीरे पूरे विद्यालय में नेतृत्व की भावना विकसित होगी।
मेरी शिक्षा के बारे में सोच
मैं शिक्षा को केवल परीक्षा, अंक और प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं मानता।
मेरे लिए शिक्षा का अर्थ है कि विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग सही काम के लिए करे और किसी दूसरे के जीवन में भी उपयोगी बने।
मैं चाहता हूँ कि विद्यार्थी केवल यह न सोचे कि
“मैं जीवन में क्या बनूँगा?”
बल्कि वह यह भी सोचे कि
“मैं आज किसी दूसरे के लिए क्या कर सकता हूँ?”
मेरे लिए यही सोच एक विद्यार्थी को एक अच्छे विद्यार्थी से एक अच्छे इंसान की ओर ले जाती है।
इसी पहल के माध्यम से मेरा प्रयास है कि विद्यार्थी नेतृत्व को समझे, जिम्मेदारी निभाए, दूसरों को पढ़ाए, अपने काम का मूल्य समझे और अपने बाद आने वाले विद्यार्थियों के लिए एक अच्छा उदाहरण बने।
क्योंकि मेरे लिए सच्चा नेता वह नहीं है जो सबसे आगे खड़ा हो।
सच्चा नेता वह है जो अपने साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाए।
और शिक्षा की सबसे बड़ी सफलता तब है जब एक विद्यार्थी स्वयं सीखने के बाद किसी दूसरे को सिखाए और फिर वही दूसरा विद्यार्थी आगे चलकर किसी तीसरे को आगे बढ़ाए।
यही मेरी इस पहल की मूल सोच है।
नेतृत्व केवल एक पद नहीं है।
नेतृत्व जिम्मेदारी है।
शिक्षा केवल स्वयं आगे बढ़ना नहीं है।
शिक्षा दूसरों को आगे बढ़ाने की क्षमता भी है।
