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Beyond Academic : पाठ्यक्रम से आगे सीखने की मेरी शैक्षिक दृष्टि

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पुस्तक से आगे विषय की वास्तविक समझ और भविष्य की तैयारी

एसटीबीए में कार्य करते हुए मैंने हमेशा विद्यार्थियों के लिए बियॉन्ड अकादमिक पर विशेष ध्यान देने का प्रयास किया है। लेकिन मेरे लिए बियॉन्ड अकादमिक का अर्थ कभी केवल सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ, प्रतियोगिताएँ या विद्यालय के बाहर होने वाले कार्यक्रम नहीं रहा।

मैं शुरू से ही इस बात को लेकर स्पष्ट रहा हूँ कि बियॉन्ड अकादमिक का अर्थ है बियॉन्ड द सिलेबस।

पाठ्यक्रम की अपनी एक निश्चित सीमा होती है। विद्यार्थी उसमें निर्धारित विषयों और अवधारणाओं को पढ़ता है, लेकिन किसी विषय का वास्तविक ज्ञान केवल उसकी पुस्तक में लिखी सामग्री तक सीमित नहीं होता। विषय को समझना, उसे वास्तविक जीवन में देखना, उसके व्यवहारिक पक्ष को जानना और भविष्य में उसका उपयोग कर पाना ही मेरे लिए विषय की वास्तविक शिक्षा है।

इसी सोच के साथ मेरा प्रयास रहा है कि विद्यार्थी अपने विषय में केवल परीक्षा की तैयारी करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने स्तर से कुछ आगे की जानकारी और व्यावहारिक समझ भी विकसित करें।

मेरी सोच हमेशा यह रही है कि जब यही विद्यार्थी उच्च शिक्षा में जाएँ या उद्योग जगत में अपने विषय से जुड़े कार्य का सामना करें, तो उन्हें यह महसूस न हो कि उन्होंने केवल किताब पढ़ी थी। उन्हें अपने विषय की वास्तविक दुनिया से परिचित होना चाहिए।

वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए कक्षा से वास्तविक कार्यक्षेत्र तक

इसी सोच के अंतर्गत कक्षा 11 और 12 के वाणिज्य विद्यार्थियों के लिए मैंने कई ऐसे नए प्रयोग शुरू किए, जो उन्हें पाठ्यक्रम से आगे ले जाने वाले थे।

लेखाशास्त्र विषय में विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तक के आधार पर पढ़ाने के बजाय टैली सॉफ्टवेयर पर लेखांकन का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। मेरा उद्देश्य था कि विद्यार्थी जब लेखाशास्त्र पढ़ें, तो उन्हें यह भी पता हो कि वास्तविक कार्यक्षेत्र में लेखांकन किस प्रकार किया जाता है।

इसी क्रम में विद्यार्थियों को विद्यालय के लेखा विभाग में जाकर वहाँ होने वाले वास्तविक कार्यों को समझने का अवसर दिया गया। इससे उन्हें यह देखने का अवसर मिला कि कक्षा में पढ़ी गई अवधारणाएँ वास्तविक परिस्थितियों में किस प्रकार काम करती हैं।

इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए उद्योगों और दुकानों के भ्रमण की व्यवस्था की गई। किसी व्यवसाय को केवल बाहर से देखने और उसके भीतर की कार्यप्रणाली को समझने में बहुत अंतर होता है। इसलिए मेरा प्रयास रहा कि विद्यार्थी स्वयं जाकर देखें कि खरीद, बिक्री, लेखांकन, प्रबंधन, उत्पादन और अन्य व्यावसायिक प्रक्रियाएँ वास्तविक जीवन में किस प्रकार संचालित होती हैं।

उद्योग भ्रमण को अनिवार्य अनुभव बनाना

धीरे धीरे उद्योग भ्रमण को विद्यार्थियों के लिए एक अनिवार्य अभ्यास का रूप दिया गया।