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राजस्थान पत्रिका

श्रीलंका और पाक से बेहतर है बांग्लादेश की स्थिति

आइएमएफ से ऋण के लिए आवेदन दूरगामी सोच का परिणाम

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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कोरोना के समय के दौरान बहुत चर्चा में रही थी। उसकी वार्षिक वृद्धि दर 2020-21 में 6.94 प्रतिशत दर्ज हुई थी। इसके विपरीत उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रथम तिमाही में नकारात्मक वृद्धि दर दर्ज हुई थी। ये चर्चा उन दिनों काफी आम थी कि बांग्लादेशी प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक है। इन सब के कारण एक ऐसी अवधारणा आमजन में थी कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी प्रगति के साथ आगे बढ़ रही है। इन दिनों फिर से बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था चर्चा में है क्योंकि बांग्लादेशी वित्तमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) को 4.5 बिलियन अमरीकन डॉलर के वित्तीय ऋण के लिए आवेदन किया है। इससे एकाएक ऐसी आशंकाओं को बल मिला है कि क्या बांग्लादेश में आर्थिक विकास एक छलावा जैसा दिख रहा है? क्या बांग्लादेश भी श्रीलंका तथा पाकिस्तान के जैसे विदेशी मुद्रा भंडारण की कमी के संकट से जूझ रहा है? बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पर पैनी नजर रखना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान समय में उसकी अर्थव्यवस्था 416 बिलियन डॉलर के बराबर है। प्रति व्यक्ति आय में भी पिछले काफी वर्षों से लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को वित्तीय ऋण के लिए किया गया आवेदन का प्रत्यक्ष कारण समझ में नहीं आता है।

अगर विदेशी मुद्रा भंडारण की बात की जाए, तो चालू वित्तीय वर्ष में उसमें कमी दर्ज हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष में ये 45.5 बिलियन अमरीकी डॉलर के बराबर था, तो वहीं अब ये 39.67 बिलियन डॉलर है। विदेशी मुद्रा भंडारण में हुई कमी के पीछे के भी कई कारण हैं, जिनमें मुख्यतः कोरोना के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी बांग्लादेशियों का अपने मुल्क में लौटना रहा है। इसके फलस्वरूप रेमिटेंस के माध्यम से होने वाली विदेशी मुद्रा की आय में बड़ी कमी देखी गई है। वहीं, दूसरी तरफ बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार निर्यात के अंतर्गत कपड़ा व्यापार है, जिसमें पिछले काफी समय से गिरावट दर्ज की जा रही है। रूस और यूक्रेन के युद्ध से कच्चे तेल के मूल्य में बढ़ोतरी ने भी आयात को महंगा किया है। इसके बावजूद यह भी समझा जा सकता है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम नहीं है कि एकाएक किसी आर्थिक संकट का अंदेशा दिखे। वर्तमान समय का विदेशी मुद्रा संग्रहण कम से कम 5 माह के आयात के भुगतान के लिए उचित प्रतीत होता है, जबकि इसके विपरीत पाकिस्तान में विदेशी मुद्रा भंडार 5 बिलियन अमरीकन डॉलर ही रह गया है। यह भी सच्चाई है कि इन दिनों बांग्लादेश में महंगाई दर काफी अनियंत्रित हो चुकी है। बांग्लादेश की मुद्रा भी अमरीकन डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई है, लेकिन अन्य पड़ोसी मुल्कों जैसे पाकिस्तान व श्रीलंका की तुलना में बहुत मजबूत स्थिति में है।

सकारात्मक दृष्टि से अगर विश्लेषण किया जाए, तो यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि निश्चित रूप से बांग्लादेश अपने पड़ोसी मुल्कों श्रीलंका और पाकिस्तान से काफी बेहतर स्थिति में है। यह समझना होगा कि दूरगामी सोच को आगे रखते हुए शायद बांग्लादेशी वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को वित्तीय ऋण के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा यह समझना भी अत्यंत आवश्यक है कि बांग्लादेश को इन्हीं दिनों 10 बिलियन अमरीकन डॉलर के बराबर की विदेशी सहायता भी मिली है। मुख्य रूप से विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, जापान, रूस व चीन मुख्य सहयोगी रहे हैं, जिनके माध्यम से आने वाले समय में बांग्लादेश में आधारभूत संरचनाओं के विकास में तेजी आएगी। बांग्लादेश की इस बात के लिए भी सराहना की जानी चाहिए कि विपरीत परिस्थितियों से निकलते हुए भी बांग्लादेश ने अपने पड़ोसी मुल्क श्रीलंका को 250 मिलियन अमरीकन डॉलर की सहायता दी है, जो कि काबिले तारीफ है।

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As printed in राजस्थान पत्रिका.