राजस्थान टुडे
मुक्त व्यापार की छाया में केंद्रीय बजट
वैश्विक टैरिफ दबावों और मुक्त व्यापार समझौतों की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत बजट 2026-27 में सरकार की प्राथमिकताएं बदली नजर आती हैं। पूंजीगत खर्च, कर राहत और कृषि जैसे मुद्दों पर खामोशी के बीच एमएसएमई, एआई और सेवाक्षेत्र पर जोर दिखता है।
मोदी सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 का बजट पूर्णतया वैश्विक स्तर पर हुए बदलावों के दबाव में और इसके चलते ही तीव्र आर्थिक सुधार बजट से नदारद दिखे। इस बजट में आम जनता को ना तो किसी तरह से करों की दरों में कमी मिली और ना ही महंगाई से पड़ रही मार से कोई राहत। सबसे अधिक हैरानी वाली बात सरकार के द्वारा पूंजीगत खर्चों में बढ़ोतरी के संबंध में भी कोई घोषणा नहीं हुई जो बीते कई वर्षों में मोदी सरकार की एक बहुत बड़ी ताकत रही है और इसी के चलते बजट के तुरंत बाद स्टॉक मार्केट में बहुत बड़े स्तर गिरावट पर दर्ज हुई।
बजट 2026-27 के संबंध में विश्लेषण का आधार यही बताता है कि सरकार, राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों के दबाव के चलते पहले से ही दिवाली से पूर्व जीएसटी की दरों में बहुत बड़े स्तर पर कमी कर चुकी है और उसे राजस्व में बड़ी कमी हुई और इसके साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार के द्वारा आयकर की सीमा में भी बड़ा बदलाव किया गया जिसके चलते भी प्रत्यक्ष करों के संग्रहण में तुलनात्मक रूप से कमी हुई है। इसी कारण पूंजीगत खर्चों में बढ़ोतरी पर कोई घोषणा नहीं हुई जो यकीनन मोदी सरकार की उस सोच पर एक प्रश्न उठाता है जो हमेशा से उसकी पहचान हुआ करती थी। विश्लेषण का अन्य आधार यह भी है कि ये बजट पूर्णतया सरकार के द्वारा ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बचने के लिए बीते कुछ महीनों में बड़ी तेजी से हुए मुक्त व्यापार समझौतों की छाया में बना है। सरकार जीएसटी की दरों में कमी से घरेलू बाजार में बचत को पहले से ही बढ़ा चुकी है और अब सरकार का पूरा फोकस मुक्त व्यापार समझौते के तहत निर्यातों को बढ़ाने पर है और उसी के माध्यम से विदेशी पूंजी बाजार के संग्रहण पर भी। सरकार ने राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण को स्थापित कर लेने के लिए अपनी पीठ भी थपथपाई है। और इस संबंध में वर्ष 2021-22 में की गई घोषणा के तहत राजकोषीय घाटे 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने में सफलता का जिक्र भी किया है और आगामी बजट में इसे 4.3 प्रतिशत पर लाने के उद्देश्य को बड़ी प्रमुखता के साथ रखा भी है।
एआई
के क्षेत्र में भारत को अपनी बढ़त बहुत तेजी से बढ़ानी होगी और इसके लिए सरकार के द्वारा सभी विदेशी कंपनियों को जो भारत में क्लाउड सर्विसेज के अंतर्गत अपनी सेवाएं प्रदान करेंगी उनसे 2047 तक शत प्रतिशत कर छूट देने की घोषणा की है, यह कदम बहुत उत्साहजनक है। परंतु एआई के वे भारतीय स्टार्टअपस जो भारत छोड़कर अमेरिका में सेवाएं दे रहे हैं उन्हें वापस आकर्षित करने हेतु प्रयासों पर बजट में चुप्पी अखरती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर
डेवलपमेंट में 7 रेल कॉरिडोर के अलावा कोई बड़ी घोषणा नहीं दिखी जो बड़ा हतप्रभ करती है। किसानों के संबंध में उनकी आय को शुरू से दुगना करने की बात करने वाली मोदी सरकार इस बजट में पूर्ण रूप से शांत दिखी। मात्र कुछ घोषणाएं काजू और नारियल की खेती के संबंध में की गई है ताकि उस संबंध में भारत आत्मनिर्भरता को प्राप्त करके निर्यातों की तरफ बड़ी तेजी से बढ़े। परंतु उसके अलावा किसानों के ऋण व एमएसपी इत्यादि पर कोई बात नहीं रखी गई है जो बहुत निराशाजनक है।
कैंसर: कस्टम ड्यूटी खत्म
वैश्विक बाजार में भारत की जैविक दवाइयों के उत्पादन में बढ़त को स्थापित करने की पहल फार्मा सेक्टर के लिए बहुत उत्साहजनक है। इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के द्वारा निजी क्षेत्र के साथ आगे बढ़ते हुए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने की बात की गई है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की बीमारियों की जांच, आवश्यक देखभाल और मरीज की पुनर्वास से संबंधित सभी सुविधाओं को एक छत के नीचे लाने की बात की गई है इससे आने वाले समय में स्वास्थ्य के क्षेत्र में रोजगारों की भरने की काफी संभावना है। कैंसर की 17 दवाओं को कस्टम ड्यूटी खत्म करना भी एक आवश्यक अच्छी पहल के रूप में रखा जा सकता है। इससे समाज को एक बड़ी राहत मिलेगी।