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दैनिक नवज्योति

भारत की लगातार बढ़ती विकास दर

09 Jun 2023

पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बीते हफ्ते घोषित हुए जीडीपी के आंकड़ों ने मोदी सरकार को अपने नौ वर्षों की उपलब्धियों को बढ़ाया है। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.2 प्रतिशत की विकास दर को हासिल किया है, जो कि कई बड़े वैश्विक संस्थानों जैसे आईएमएफ, विश्व बैंक इत्यादि के पूर्वानुमानों से अधिक है। इसके साथ-साथ खुद मोदी सरकार के पूर्वानुमान से भी ये अधिक रही है। इस आंकड़े के साथ ही आगामी एक दशक में भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर होता दिख रहा है। चूंकि जीडीपी आंकड़ों से परिभाषित होता है तो इस पर विश्लेषण के भी कई मत रहते हैं। आलोचना भी हो रही है कि 21-22 में आर्थिक विकास की दर 9 प्रतिशत से अधिक थी जो अब 7 प्रतिशत पर आकर सिमट गई है। ये वास्तविकता संकीर्ण रुख रखे हुए है, क्योंकि 2020-21 के समय कोरोना के कारण 40 वर्षों के बाद पहली दफा वार्षिक विकास दर नकारात्मक थी और बाद में उसमें अप्रत्याशित वृद्धि होना जायज था।

जीडीपी के आंकड़ों को अगर विभिन्न भागों में विभक्त करके विश्लेषण किया जाए तो पांच बातें मुख्य हैं। प्रथम- कृषि क्षेत्र ने 4 प्रतिशत की विकास दर को हासिल किया है, जो कि पिछले वित्तीय वर्ष से अधिक है। लगातार चारों तिमाहियों में इसमें वृद्धि देखने को मिली है तथा सबसे अधिक वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत जनवरी से मार्च वाले तिमाही में रही है। ये इस बात का संदेश भी है कि रबी व खरीफ दोनों की फसलों की उपज पिछले वर्ष बहुत अच्छी रही है। यकीनन भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले मुल्क के लिए ये एक खुशखबरी है। द्वितीय तथ्य ये है कि सर्विस क्षेत्र ने फिर से अपनी बागडोर को अर्थव्यवस्था में बनाए रखा है तथा 28.3 प्रतिशत की विकास दर को हासिल किया है। इस पक्ष पर सकारात्मक रुख ये देखने को मिला है कि वित्तीय तथा रियल एस्टेट सेक्टर ने अब समाज में अपनी पकड़ को काफी मजबूत किया है। पिछले वर्ष की तुलना में इनमें तकरीबन 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो आने वाले समय में कई आयामों को एक नया रूप देगी।

तीसरा सकारात्मक पक्ष ये देखने को मिला है कि अर्थव्यवस्था का कोर सेक्टर जो कि आठ भागों से मिलकर बनता है जिसमें कोयला, क्रूड ऑयल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी, उर्वरक, स्टील, सीमेंट व विद्युत सम्मिलित हैं ने आश्चर्यजनक तरीके से 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की है। सबसे अधिक बढ़ोतरी कोयले के क्षेत्र में देखने को मिली है, जहां पर तकरीबन 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। विदित रहे कि समाज में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका कोयले के अलावा विद्युत, स्टील व सीमेंट निभाते है। आंकड़ों का विश्लेषण ये बता रहा है कि कोयले के साथ-साथ बाकी बचे इन तीनों क्षेत्रों ने भी 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हासिल की है। ये इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बड़ी तेजी से आधारभूत संरचनाओं के विकास पर आगे बढ़ रही है। मात्र क्रूड ऑयल के अंतर्गत ही नकारात्मक वृद्धि दर दर्ज की गई है, जो बहुत हद तक रूस और यूक्रेन के युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर बीते वर्ष एक लंबे अरसे तक कच्चे तेल के मूल्यों में बढ़ोतरी से संबंधित दिखती है।

चौथा पक्ष मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से संबंधित चिंता के सबब को प्रस्तुत करता है, क्योंकि ये सेक्टर मात्र 1.3 प्रतिशत की विकास दर को ही हासिल कर पाया है जो कि वित्तीय वर्ष 21-22 मई 11 प्रतिशत थी। वहीं हैरानी वाली बात ये है कि जब कोर सेक्टर के सभी क्षेत्र बढ़ोतरी हासिल कर रहे हैं तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इतना कम क्यों? उसमें भी द्वितीय और तृतीय तिमाही में 3.8 व 1.4 प्रतिशत नकारात्मक रहना जबकि मोदी सरकार लगातार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए नित नई योजनाओं की घोषणा कर रही है। पीएलआई स्कीम के तहत लगभग 2 ट्रिलियन रुपए का निवेश भी इसमें सम्मिलित है। ये इस बात का भी संकेत है कि सामाजिक कल्याण की योजना मनरेगा में कटौती करके मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बजट में बढ़ावा देना धरातल पर उतना प्रभावी नहीं दिख रहा है। पांचवां पक्ष अर्थव्यवस्था में निवेश के प्रति सकारात्मक रुख लिए सामने आया जिसके अंतर्गत ये देखने को मिला है कि विभिन्न विकास की योजनाओं पर सरकार का पूंजीगत खर्च तथा निजी वित्तीय निवेश दोनों बढ़ें हैं। आंकड़ों के मुताबिक चौथी तिमाही में सरकार का पूंजीगत खर्च तकरीबन 2.46 ट्रिलियन रुपए के बराबर रहा। ये भी देखने मिला है कि वर्तमान समय में सरकारों व निजी वित्तीय निवेश जीडीपी के 34 प्रतिशत के बराबर है, जो कि मोदी सरकार के पिछले 9 सालों में सबसे अधिकतम स्तर पर है। इस कारण ही अब भारत में विभिन्न निजी परियोजनाओं में पिछले एक दशक की तुलना में ज्यादा रिकवरी देखने को मिल रही है जो अर्थव्यवस्था के लिए बहुत सकारात्मक है।

-डॉ. पी.एस. वोहरा

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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कृषि क्षेत्र ने 4 प्रतिशत की विकास दर को हासिल किया है, जो कि पिछले वित्तीय वर्ष से अधिक है। लगातार चारों तिमाहियों में इसमें वृद्धि देखने को मिली है तथा सबसे अधिक वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत जनवरी से मार्च वाले तिमाही में रही है। ये इस बात का संदेश भी है कि रबी व खरीफ दोनों की फसलों की उपज पिछले वर्ष बहुत अच्छी रही है। यकीनन भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले मुल्क के लिए ये एक खुशखबरी है।

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As printed in दैनिक नवज्योति.