राजस्थान पत्रिका
नए आयकर बिल का मकसद अधिक पारदर्शिता लाना
मोदी सरकार पिछले कुछ अर्से से टैक्स से संबंधित कानूनों में तेजी से बदलाव ला रही है, ताकि उसके माध्यम से समाज के सभी तबकों को विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित किया जा सके। आयकर कानून में बदलाव का उद्देश्य भाषा का सरलीकरण करना है ताकि इसके प्रावधानों को अधिक करदाता समझ सकें।
मोदी सरकार ने नया आयकर बिल-2025 बीते दिनों संसद में प्रस्तुत कर दिया, जिसके संबंध में 1 फरवरी को केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी। संसद के पटल पर बिल प्रस्तुत होने के बाद अब इसमें चर्चा के बाद कुछ प्रस्तावित बदलावों को सरकार की ओर से सूचित किया जाएगा तथा बाद में उन बदलावों को इस बिल में शामिल कर, इसे नए आयकर कानून का दर्जा दे दिया जाएगा। यह कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। वर्तमान में चल रहा आयकर कानून वर्ष 1961 में बना था तथा पिछले लंबे अरसे से इस कानून में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी।
ज्ञात रहे कि मोदी सरकार पिछले कुछ अर्से से टैक्स से संबंधित कानूनों में तेजी से बदलाव ला रही है ताकि उसके माध्यम से समाज के सभी तबकों को विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित किया जा सके। आयकर कानून में बदलाव का उद्देश्य इस कानून की भाषा का सरलीकरण करना है ताकि इसके प्रावधानों की अधिक से अधिक समझ करदाताओं को हो सके। उसके अलावा दूसरा मुख्य उद्देश्य इस नए कानून के माध्यम से कर व्यवस्था को मजबूत करना है ताकि करदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हो सके। यह स्पष्ट करना भी अत्यंत आवश्यक है कि मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल से भारत में व्यापार करने के तौर तरीकों को बहुत आसान बनाना चाहती है जिसे आम बोलचाल की भाषा में 'ईज ऑफ डूइंग' बोला जाता है। इस संबंध में सरकार की एक मुख्य सोच यह भी है कि कर विवाद तथा इससे संबंधित न्याय व्यवस्था में मुकदमे लंबे अरसे तक चलते रहते हैं जो पूंजी लगाने वाले व्यापारी तथा उद्योगपति को निराश करते हैं। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि कर न्याय व्यवस्था में सुधार हो तथा लंबी मुकदमेबाजी की प्रथा का जल्द से जल्द समापन हो सके।
आयकर बिल 2025, आयकर कानून 1961 का स्थान लेगा। मोटे तौर पर इस नए बिल के अंतर्गत पुराने कानून के उन सभी प्रावधानों को यथासंभव रखा गया है जो भारत में आयकर की मुख्य व्यवस्था के आधार थे। लेकिन इस बिल में पुराने कानून की कुछ अनावश्यक धाराओं को हटा दिया गया है और इसे एक छोटे प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है। पुराने कानून में जहां 819 धाराएं थीं, वहीं इस बिल में 536 धाराओं को जगह दी गई है। इसके अलावा पुराने आयकर कानून में कुल 512000 शब्द थे जबकि इस बिल में करीब 270000 शब्द ही हैं जो यह बताता है कि पुराने कानून की शब्दावली का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इस नए बिल में हटा दिया गया है।
इसके अलावा पुराने कानून में कुल 47 अध्याय थे जबकि इस बिल में मात्र 23 अध्यायों को ही सम्मिलित किया गया है। जैसा कि विदित है कि मोदी सरकार द्वारा इस बिल को बनाने का मुख्य कारण इसको सरल भाषा में समाज के सामने प्रस्तुत करना है और इस संबंध में पिछले कानून में यह देखा गया था कि टीडीएस की बात हो या आयकर की दरों की या कटौतियों की, उन सभी में कानूनी प्रावधान काफी क्लिष्ट थे। पुराने कानून में मात्र 18 टेबल अथवा सारणी का ही उल्लेख था जबकि इस बिल में भाषा के सरलीकरण के उद्देश्य से इन सभी तकनीकी प्रावधानों को कुल 57 सारणी में विस्तृत रूप से वर्णित किया गया है। इस बिल का एक अन्य सकारात्मक पक्ष यह है कि टीडीएस से संबंधित सभी प्रावधानों को एक सारणी में ही समायोजित किया गया है।
मोदी सरकार द्वारा आयकर बिल 2025 का एक अन्य मुख्य प्रावधान यह भी है कि अब तक आयकर के भुगतान में मूल्यांकन वर्ष जिसे बोलचाल की भाषा में 'एसेसमेंट ईयर' भी कहा जाता है, इसके चलते आयकर की रिटर्न भरते समय करदाताओं को काफी परेशानियों का सामना करता पड़ता था। इस बिल के अंतर्गत मूल्यांकन वर्ष या एसेसमेंट ईयर के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह कर वर्ष या टैक्स ईयर शब्द का उपयोग किया गया है। यानी कि अब वित्तीय वर्ष जो कि अप्रैल से मार्च के बीच में होता है, उसे कर की भाषा में कर वर्ष कहा जाएगा और उसी कर वर्ष में पिछले वित्तीय वर्ष में कमाई गई आय पर कर का भुगतान करना होगा। जबकि इससे पूर्व में वित्तीय वर्ष व मूल्यांकन वर्ष अलग-अलग हुआ करते थे। इस आयकर बिल में क्रिप्टो करेंसी के लेन-देन से होने वाले मुनाफे पर प्रत्यक्ष तौर पर दीर्घकालीन पूंजीगत कर की घोषणा की गई है। अब क्रिप्टो करेंसी और अन्य किसी भी तरह की डिजिटल करेंसी को आयकर के अंतर्गत संपत्ति की अवधारणा में सम्मिलित कर लिया गया है। इसके चलते अब उनके लेन-देनों पर होने वाले मुनाफे पर अन्य संपत्तियों जैसे सोना, जमीन, मकान आदि पर जैसे आयकर के प्रावधान हैं वैसे ही कर के प्रावधान अब क्रिप्टो करेंसी व अन्य डिजिटल करेंसी पर भी लागू होंगे।
नए आयकर कानून के अनुसार अब आयकर विभाग द्वारा करदाताओं से उनकी ईमेल, बैंकिंग, ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की विस्तृत जानकारी मांगी जा सकती है, अगर किसी करदाता के डिजिटल लेन-देन से कुछ आय होने की संभावना दिखती है। इससे पूर्व के कानून में आयकर विभाग की सक्षमता के लिए इस तरह के प्रावधान नहीं थे। इस बिल में अकाउंटेंट की परिभाषा में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस संबंध में पिछले कुछ समय से सरकार का रुख चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ लागत व प्रबंध लेखाकार (सीएमए) को भी आयकर में अकाउंटेंट की परिभाषा में एक समान सम्मिलित करने का था, पर इसे नहीं किया गया। इससे कुछ निराशा जरूर है।
यह बिल अब संसद में प्रस्तुत कर दिया गया है और इसमें प्रस्तावित बदलावों को चर्चा और अनुसूचित करने के बाद इसे कानून की शक्ल के रूप में सरकार द्वारा अमलीजामा पहना दिया जाएगा। सारांश के रूप में यह कहा जा सकता है कि इस बिल के माध्यम से सरकार आर्थिक नीतियों में बहुत अधिक पारदर्शिता को स्थापित करना चाहती है ताकि कर न्याय व्यवस्था अधिक से अधिक मजबूत हो और कर विवाद की लंबी मुकदमेबाजी का जल्द निस्तारण हो तथा करदाताओं में आयकर के भुगतान के संबंध में विश्वास स्थापित हो।