देश के आर्थिक सफर से रूबरू कराती पुस्तक
पुस्तक 'आर्थिक सफरनामा' आजाद भारत की कुछ ऐतिहासिक आर्थिक घटनाओं, चुनौतियों, अवसरों तथा आम आदमी की आर्थिक जीवन शैली से रूबरू करवाती है। पुस्तक के लेखक डॉ. पीएस वोहरा आर्थिक मामलों के जानकार हैं। 252 पृष्ठों की ये पुस्तक पांच भागों में विभक्त है।
पुस्तक के पहले भाग में लेखक देश की कुछ ऐतिहासिक घटनाओं की बहुत रोचकता से आर्थिक विवेचना करते हैं। इनमें हरित क्रांति, जीवन बीमा, 1991 के आर्थिक सुधारों के विभिन्न आर्थिक पहलुओं पर व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए उनकी विस्तृत व्याख्या की गई है कि कैसे इनके कारण भारतीय समाज में एक वित्तीय नवाचार का जन्म हुआ।
पुस्तक के दूसरे भाग में लेखक ने भारतीय अर्थव्यवस्था की 13 चुनौतियां को बताया है। बेरोजगारी, गरीबी स्तर, आम आदमी के मुद्दे, किसान, असंगठित क्षेत्र, मुद्रास्फीति, राज्य और केंद्र का ऋण स्तर, महिलाओं का वित्तीय सशक्तीकरण, पेंशन, ढांचागत विकास, मनरेगा, जनसंख्या और हैप्पीनेस इंडेक्स की सार्थक व्याख्या में विभिन्न आकंडों और तथ्यों का विश्लेषणात्मक उपयोग किया है। पुस्तक का तीसरा भाग समाज के समग्र विकास के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की विभिन्न सफलताओं और अवसरों के बारे में बताता है। इसमें रोजगार के अवसर, जीएसटी, आत्मनिर्भरता, शेयर बाजार, डिजिटल मुद्रा, जी-20 सहित 7 अध्याय शामिल हैं। पुस्तक के चौथे भाग में अनेक वैश्विक पहलुओं को लिखा और समझाया गया है।
पुस्तक के पांचवें भाग में लेखक ने दुकानदार, किसान, सब्जी विक्रेता, दूध विक्रेता, टैक्सी चालक, प्रॉपर्टी डीलर, इंश्योरेंस डीलर और शिक्षक को शामिल किया है। इन सभी से लेखक ने उनकी वास्तविक आर्थिक जीवन शैली को जानने का प्रयास किया है। किताब देश के 75 वर्षों में हुई आर्थिक विकास की स्थिति की विवेचना करती है और उन पर रोशनी डालती है।
अमिता सेठिया