राजस्थान पत्रिका
आवश्यक है स्टार्टअप क्षेत्र में एकाधिकार को तोड़ना
युवा वर्ग को उद्योग-व्यापार के क्षेत्र में नवाचार के लिए मिले प्रोत्साहन
यह गर्व करने वाली बात है कि आज भारत के पास यूनिकॉर्न स्टेटस वाले बहुत सारे स्टार्टअप हैं, जिनका मूल्यांकन अमरीकी डॉलर में एक बिलियन से अधिक है। लेकिन, इन दिनों इस बात को भी बड़ी प्रमुखता से महसूस किया जा रहा है कि स्टार्टअप के इस दौर में पिछले कुछ वर्षों में जिन व्यावसायिक नवाचारों ने भारतीय समाज में अपनी बहुत पहुंच बनाई है उन क्षेत्रों में मात्र दो या तीन कंपनियों के ही एकाधिकार जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। इस कारण इन दिनों भारतीय युवाओं में नए नवाचारों को करने के प्रति कुछ निराशा का माहौल है।
इन दिनों आर्थिक विकास पर जहां भी बात होती है, तो इसका सारा श्रेय इंटरनेट व टेलीकॉम के विस्तार को मिलता है। नई तकनीक की मदद से शुरू हुए व्यावसायिक नवाचारों ने कई भारतीय युवाओं को नौकरियों की रेस से बाहर निकालकर उद्यमिता की तरफ जोड़ने का कार्य किया है। मुश्किल यह है कि इन क्षेत्रों में भी कुछ कंपनियों के एकाधिकार जैसी स्थिति बन चुकी है। जैसे ऑनलाइन खरीदारी के अंतर्गत अमेजन तथा फ्लिपकार्ट का नाम ही हर किसी की जुबान पर है, तो वहीं भोजन या मनपसंद के खाने की वस्तुओं की डिलीवरी के लिए जोमेटो व स्विगी का कोई दूसरा विकल्प नहीं दिख रहा है। इन व्यावसायिक नवाचारों की तस्वीर का दूसरा पक्ष यह भी है कि इनके बिजनेस मॉडल के अंतर्गत मुनाफे के प्रतिशत ने प्रत्यक्ष रूप से लागत को बढ़ाया है, जिसका आखिरी भार उपभोक्ता वहन कर रहा है। बड़ा ताज्जुब हुआ था जब फूड डिलीवरी करने वाली मोबाइल एप्लीकेशन की एक कंपनी ने कोरोना के बाद बहुत सफलता के साथ भारतीय पूंजी बाजार में अपने आइपीओ को पेश किया तथा उसे बहुत बड़ी सफलता भी मिली। यानी कि अब वह मोबाइल एप्लीकेशन वाला स्टार्टअप मुंबई स्टॉक मार्केट में एक लिस्टेड कंपनी है। उसी तरह ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में पिछले लंबे अरसे से मात्र दो कंपनियों ओला और उबर की ही समाज में पकड़ है। युवा इस तरह के व्यावसायिक नवाचारों से प्रोत्साहित होकर कुछ करना तो चाहता है, पर वह इसलिए सफल नहीं हो पा रहा क्योंकि तकनीक के माध्यम से इन कुछ कंपनियों ने आम भारतीय तक अपनी इतनी पहुंच बना रखी है कि दूसरा कोई विकल्प ही नजर नहीं आता है। ध्यान देने की बात यह है कि पुराने दौर में जब इस तरह की तकनीक नहीं थी, तो समान व्यावसायिक क्षेत्र वाले कई विकल्प समाज में स्थापित हुए।
सरकार कुछ सतर्क हुई है। ओएनडीसी की स्थापना इस दिशा में एक बहुत बड़ी पहल है। ओएनडीसी एक ऐसा ओपन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जिसके अंतर्गत बेचने वाला व खरीददार दोनों प्रत्यक्ष रूप से जुड़ सकते हैं। सरकार की इस पहल के माध्यम से निश्चित तौर पर इन स्थापित व्यावसायिक नवाचारों के अंतर्गत नए स्टार्टअप को मौका मिलेगा। भारत इन दिनों चार ट्रिलियन डॉलर के बराबर की अर्थव्यवस्था है तथा आगामी दस वर्षों तक विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है। निश्चित तौर पर भारत को इस दौरान युवाओं में उद्यमिता के प्रति एक सकारात्मक मानसिकता पैदा करनी होगी। इसके लिए सभी नए व्यावसायिक नवाचारों के क्षेत्रों में एकाधिकार की स्थिति को नहीं बनने देना होगा, अन्यथा युवाओं को आकर्षित करना बड़ा मुश्किल रहेगा।