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एसटीबीए में उद्यमिता विषय : एक सोच से एक सशक्त शैक्षिक पहल तक
Learning by doing
विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच, कौशल और अवसर निर्माण की क्षमता विकसित करने का एक सतत प्रयास
एसटीबीए में कार्य करते हुए मेरी प्राथमिकताओं में शुरू से ही यह रहा है कि विद्यार्थी केवल अपनी पढ़ाई और परीक्षाओं तक सीमित न रहें। उनमें ऐसे ज्ञान, कौशल और सोच का भी विकास हो, जो उन्हें भविष्य के जीवन और करियर के लिए तैयार करे।
इसी सोच के साथ मैंने महसूस किया कि विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर से ही उद्यमिता विषय का अध्ययन कराया जाना चाहिए। वे यह समझें कि भविष्य केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है। यदि उनके पास कोई अच्छा विचार, कौशल और उसे आगे बढ़ाने का साहस है, तो वे स्वयं भी अवसर पैदा कर सकते हैं।
स्वीकृत विषय बनने से पहले ही हुई शुरुआत
जब विद्यालय में उद्यमिता विषय को औपचारिक रूप से पढ़ाने की स्वीकृति नहीं थी, तब भी मैंने इसे विद्यार्थियों के लिए आवश्यक समझा। इसी उद्देश्य से वर्ष 2017 में मैंने विद्यालय के सभागार में स्वयं उद्यमिता विषय की कक्षाएँ लेना शुरू किया।
उन कक्षाओं का उद्देश्य केवल व्यवसाय से संबंधित जानकारी देना नहीं था। मैं चाहता था कि विद्यार्थी नए विचारों के बारे में सोचें, अवसरों को पहचानें, समस्याओं के समाधान खोजें, निर्णय लेना सीखें और अपने विचारों को वास्तविक रूप देने का प्रयास करें।
मेरे लिए उद्यमिता विषय केवल एक विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में एक अलग प्रकार की सोच विकसित करने का माध्यम था।
इस पहल को औपचारिक रूप तब मिला जब वर्ष 2018 में सीबीएसई से उद्यमिता विषय की स्वीकृति प्राप्त हुई। इसके बाद वाणिज्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उद्यमिता विषय एक वैकल्पिक विषय के रूप में नियमित रूप से पढ़ाया जाने लगा।
समय के साथ इस विषय के प्रति विद्यार्थियों की रुचि लगातार बढ़ती गई और धीरे-धीरे उद्यमिता विषय उनके वैकल्पिक विषयों में पहली पसंद बन गया।
Humanities विषय में भी उद्यमिता विषय को अनिवार्य करना
बाद में जब विद्यालय में कक्षा 11 में लगभग 30 विद्यार्थियों के साथ मानविकी वर्ग शुरू किया गया, तब मैंने उद्यमिता विषय को उनके लिए भी अनिवार्य किया।
इसके पीछे मेरी सोच बहुत स्पष्ट थी। मानविकी के विद्यार्थी भी आगे चलकर देश के श्रेष्ठ महाविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययन के लिए जाते हैं। मैं चाहता था कि अपनी नियमित पढ़ाई के साथ-साथ वे ऐसी समझ और कौशल भी विकसित करें, जो उन्हें आगे के जीवन में स्वतंत्र सोचने और अपने अवसर पहचानने में मदद करे।
मेरे विचार से उद्यमिता विषय केवल वाणिज्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए नहीं है। यह विद्यार्थियों को समस्या को नए दृष्टिकोण से देखने, निर्णय लेने, नए विचारों पर काम करने और अपने लिए नए रास्ते तलाशने की क्षमता देता है।
बिज़नेस प्लान कंटेस्ट: विषय को अनुभव से जोड़ने का प्रयास
मेरी कोशिश रही है कि उद्यमिता विषय केवल कक्षा और पुस्तकों तक सीमित न रहे। इसलिए विद्यालय में नियमित रूप से व्यवसाय योजना प्रतियोगिता आयोजित करने की परंपरा विकसित की गई।
हर वर्ष विद्यार्थियों के लिए चुनौती का स्तर बढ़ाने का प्रयास किया गया, ताकि वे अपने विचारों को केवल सोचें नहीं, बल्कि उन्हें एक व्यवस्थित व्यवसाय योजना के रूप में तैयार करें और विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत करें।
हाल ही में आयोजित प्रतियोगिता में विजेता को Rs 1,00,000 का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। निर्णायक मंडल में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के दो प्रोफेसर तथा बिकाजी समूह के प्रबंध निदेशक जैसे अनुभवी विशेषज्ञ शामिल रहे।
ऐसी प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर देती हैं कि उद्यमिता विषय केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का विषय नहीं है। किसी विचार को वास्तविकता में बदलने के लिए सोच, शोध, योजना, गणना, प्रस्तुति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास सभी आवश्यक हैं।
एक विद्यार्थी की कहानी, जिसने इस प्रयास को और अर्थ दिया
इस पूरी यात्रा में कुछ विद्यार्थियों की उपलब्धियाँ ऐसी हैं, जो इस पहल को मेरे लिए और अधिक अर्थपूर्ण बनाती हैं।
हमारी एक पूर्व छात्रा ने जन्म से शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उद्यमिता विषय का अध्ययन किया और सीबीएसई की परीक्षा में 100 अंक प्राप्त किए। इस विषय के अध्ययन ने उसके भीतर स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के सपने को और मजबूत किया तथा उसने उद्यमिता को अपने भविष्य के करियर के रूप में देखने का निर्णय लिया।
आज वह एनएलसी में कार्यरत है।
उसकी कहानी मेरे लिए इसलिए विशेष है क्योंकि यह बताती है कि यदि विद्यार्थियों को सही अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे अपनी परिस्थितियों से आगे बढ़कर अपने लिए एक अलग दिशा चुन सकते हैं।
500 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँची यह पहल
आज तक 500 से अधिक विद्यार्थियों को उद्यमिता विषय का प्रशिक्षण देने का अवसर मुझे मिला है।
इन वर्षों में मेरा विश्वास और मजबूत हुआ है कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने का नाम नहीं है। यह एक ऐसी सोच है, जिसमें विद्यार्थी समस्याओं के भीतर अवसर देखना, नए विचारों पर काम करना, निर्णय लेना और अपने भविष्य के लिए स्वयं रास्ते बनाने का प्रयास करना सीखता है।
एसटीबीए में उद्यमिता विषय को स्थापित करने के पीछे मेरा उद्देश्य हमेशा यही रहा है कि हमारे विद्यार्थी केवल अच्छे अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी न बनें, बल्कि वे कौशलयुक्त, आत्मविश्वासी, स्वतंत्र सोच रखने वाले और अवसरों का निर्माण करने की क्षमता रखने वाले युवा बनें।
वर्ष 2017 में सभागार में शुरू हुई कुछ कक्षाओं से लेकर आज 500 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँची यह यात्रा मेरे लिए केवल एक विषय के विकास की कहानी नहीं है। यह उस विश्वास की यात्रा है कि यदि विद्यालय विद्यार्थियों को सही ज्ञान, सही अवसर और सही दिशा दे, तो वे अपने भविष्य के लिए नए रास्ते स्वयं बनाने की क्षमता विकसित कर सकते हैं।
