दूरगामी सोच का बजट
मोदी सरकार-2 की ओर से गुरुवार को पेश अंतरिम बजट में वित्त मंत्री ने इस पर पॉपुलर बजट का टैग लगने से बचा लिया। इस अंतरिम बजट में सरकार का मुख्य फोकस वित्तीय नियंत्रण पर रहा है। इसके लिए राजकोषीय घाटे को पिछले बजट के टारगेट से घटा कर, आने वाले मार्च के महीने तक 5.8 प्रतिशत पर रखा है। और अगले साल तक इसे 5.1 प्रतिशत पर रखा है। ये बेहतरीन प्रयास हैं। इससे सरकार को बाजार से अब कम ऋण लेने पड़ेंगे। इस कारण आरबीआई भी जल्द ही ब्याज की दरों में कटौती कर सकेगा। इससे कंपनियों की लागत कम होगी और मुनाफ़ा बढ़ेगा। ऋण सस्ते होने से आम आदमी की उपभोग क्षमता भी बढ़ेगी। सरकार इसके माध्यम से निजी निवेश को भी आकर्षित कर सकेगी। पूंजीगत खर्चों पर सरकार ने पिछले बजट के 10 लाख करोड़ के वॉल्यूम को 10 प्रतिशत से बढ़ा दिया है। जो तुलनात्मक रूप कम जरूर है पर निजी निवेश के आने से ये वॉल्यूम में बहुत बढ़ेगा। सरकार ने पर्यटन को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने को अपना मकसद बनाना साफ कर दिया है। रेलवे कॉरिडोर निर्माण भी माल की लागत को कम करने में सहायक होगा। इससे महंगाई को कम करने में मदद मिलेगी। वहीं प्रत्यक्ष करों में छूट ना मिलने से एक बार फिर आम आदमी थोड़ा निराश हुआ है। क्योंकि जीएसटी व महंगाई की अधिक दरों से वह पूरे साल परेशान रहा है।