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प्रारंभिक स्तर पर मिलने वाले वेतन में पिछले एक दशक से बहुत कम वृद्धि हुई है। इससे युवाओं में आईटी सेक्टर की कंपनियों के प्रति हताशा देखी जा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में महानगरों में स्थापित आईटी कंपनियों में प्रारंभिक स्तर पर युवाओं को मिलने वाला वार्षिक वेतन पांच लाख रुपये से शुरू हो रहा है और छोटे शहरों में तो ये तीन लाख के स्तर पर है। इसके चलते उनका मासिक वेतन 25 से 40 हजार रुपये के बीच में ही है, जिससे वे असंतुष्ट हैं। कारण है, महंगाई और इंजीनियरिंग की डिग्री की खातिर लिए गए लोन को चुकाने का बोझ।
यह सेक्टर वर्तमान में करीब 280 अरब डॉलर की वित्तीय क्षमता रखता है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2013-14 में औसतन वेतन प्रारंभिक स्तर पर 3 से 4 लाख रुपये के बीच में था, जो अब 3.8 से 4.5 लाख रुपये के बीच में देखा जा रहा है। यानी 10 वर्षों में वेतन वृद्धि 70 से 80 हजार रुपये के बीच में ही दर्ज हुई है। इन हालात में 20 से 25 साल के युवा आर्थिक प्रगति के सपने किस रूप में देखेंगे? करीब 50 लाख लोग आईटी से रोजगार पा रहे हैं, इनमें करीब 20 प्रतिशत फ्रेशर्स हैं। आईटी सेक्टर की कंपनियों के अंतर्गत बीपीओ, केपीओ पिछले कुछ दशकों से समाज में बड़े प्रचलित नाम हैं, लेकिन अब सभी बड़ी आईटी कंपनियां प्रारंभिक स्तर पर वेतन कम करने के साथ ही छंटनी भी कर रही हैं। मशहूर कंपनी टीसीएस द्वारा 12 हजार प्रारंभिक स्तर के कर्मचारियों की छंटनी अचंभित करने वाली है। वर्ष 2022-23 में इस क्षेत्र के अंतर्गत छह लाख युवाओं को प्रारंभिक स्तर पर रोजगार मिला था, जो अब एक ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक, 75 प्रतिशत कमी के साथ डेढ़ लाख रह गया है। ऐसा नहीं है कि इन कंपनियों की आय व मुनाफे में कमी आई है। बल्कि, बढ़ोतरी ही हुई है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही, अप्रैल से जून के